Vyakti Samaaj Aur Samaadhaan ( व्यक्ति समाज और समाधान ) - subh sanskar and sanskriti

Sunday, January 7, 2018

Vyakti Samaaj Aur Samaadhaan ( व्यक्ति समाज और समाधान )


व्यक्ति और समाज के समक्ष इन दिनों इतनी अधिक समस्याए है की उनकी गिनती करना बहुत ही कठिन है परिस्तिथियों के जो स्वरुप उभरते है उनका स्वरुप व्यक्ति और समाज के सम्मुख स्थानी परिस्थियों के अनुसार विचित्र रूप धारण करता है | जीवन शक्ति का भण्डार कम पड़ जाना ही अनेक भागो में दिखाई पड़ने वाली दुर्बलताओं और परेशानी का प्रमुख कारण है | दरिद्रता अनेक अभावों की जननी है एक एक अभावो को पूरा करने के लिये एक एक उपाय भी अपनाना बुरा नही है पर समुचित समाधान तभी बन पड़ेगा जब अभावो की सूची को एक एक करकर सम्पन्नता संवर्धन के लिये प्रयत्न किया जाये | इस प्रकार की सफलता मिल जाने पर अनेक अभावो से एक बारगी ही निपटा जाया जा सकता है |
हमारे इस संसार में अनगिनत कांटे और कंकड बिखरे पड़े है उनके कारण चुभन और ठोकर का खतरा बना ही रहता है इन सभी को बिन सकना और जमीन को साफ सुथरा बना सकना किसे के लिये जन्म भर भी संभव नही है रास्ता और सरल तरीका यह है कि अपने पैरों में जूता पहन लिया जाये तो आप किसी भी रास्ते पर आसानी से जा सकते है चाहे उस रास्ते पर कितने ही काटे और कंकड क्यों न हो |



हर प्रश्न को पूरा करने के लिये गणित के अलग अलग सिद्धांत नही बनाये जा सके है जो नियम लम्बे समय से चला आ रहा है उसी के सहारे अनेक सवाल हल किये जाते रहे है
आपने सुना होगा अत्यधिक चतुराई कई बार घाटे का कारण बनती है और परशानी के साथ साथ कठिनाई में फसाती है अगर दोष अपने में हो तो आलोचकों को निंदा से कभी भी रोका नही जा सकता है इन परेशानियों से बचने का एक मात्र तरीका है अपने आप को अच्छे काम पर लगाए और भगवान को कभी भी याद करना न भूले |
| Home